प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आईडीबीआई बैंक में सरकार की तरफ से 4,557 करोड़ रुपये की पूंजी डालने को मंजूरी दे दी गई। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के कारण सरकार का योगदान इसकी हिस्सेदारी तक सीमित है, जिसकी इस बैंक में पहले से ही 51 फीसदी हिस्सेदारी है। लिहाजा बीमा नियामक के नियमानुसार सरकार सीमा का उल्लंघन नहीं कर सकती। लिहाजा सरकार को अपनी पूंजी के हिस्से के अनुसार ही यह राशि डालनी पड़ी।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट के निर्णय के बारे में मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “इसके लिए पूंजी इसके शेयरधारकों से आनी है। एलआईसी की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और बीमा नियामक द्वारा उसे इससे ऊपर जाने की अनुमति नहीं है। आवश्यक 9,300 करोड़ रुपये में से एलआईसी 51 प्रतिशत हिस्सा (4,743 करोड़ रुपये) देगा। बाकी बची 49 फीसदी यानी 4,557 करोड़ रुपये की राशि सरकार की तरफ से प्रस्तावित है।”

जावड़ेकर ने कहा, “यह आईडीबीआई बैंक में बदलाव लाने की प्रक्रिया को पूरा करने में मदद करेगा और उसे लाभकारी बनाने और सामान्य ऋणदाता बनाने में सक्षम बनाएगा, और साथ ही सरकार को किसी उचित समय पर अपने निवेश की रिकवरी विकल्प प्रदान करेगा।”

जावड़ेकर ने यह भी कहा कि बैंक में यह पूंजी इसलिए डाली जा रही है, ताकि आईडीबीआई बैंक का पूंजी प्र्याप्तता अनुपात पूरा किया जा सके।

–आईएएनएस

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