संस्कृति और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाले संयुक्त राष्ट्र के एक निकाय के प्रमुख ने कहा कि कश्मीर में पाबंदी की वजह से शिया समुदाय मुहर्रम जुलूस नहीं निकाल सके, यह ‘नकारात्मक’ संकेत है।

एक सवाल के जवाब में संयुक्त राष्ट्र सभ्यता गठबंधन (यूएनएओसी) के उच्च प्रतिनिधि मिगुएल मोराटिनोस ने कहा, “कुछ भी जो बाधा पैदा करती है या लोगों को एक-दूसरे का सम्मान करने से रोकती है, नकारात्मक है।”

उन्होंने कहा, “समय आ गया है कि हमसब एक हों और हम एक-दूसरे का सम्मान करें।”

पत्रकार ने मोराटिनोस से कश्मीर में पाबंदी के बाबत सवाल पूछा था, जिसकी वजह से लोग इस सप्ताह मुहर्रम का जुलूस आयोजित नहीं कर सके।

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एक अन्य पत्रकार ने उनसे बाबरी मस्जिद संबंधी सवाल पूछा, जिसके बारे में उन्होंने ने कहा कि सदियों पुराने स्थल को संरक्षित किए जाने और इसके आस-पास के अंतरधार्मिक तनाव से भी उबरने की जरूरत है।

उन्होंने सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन यूनेस्को के साथ मिलकर यूएनएओसी के एक प्रोजेक्ट के बारे में बताया, जिसके अंतर्गत ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की पहचान की जाएगी।

उन्होंने कहा, “हम पहले से ही कुछ मुख्य ऐतिहासिक केंद्रों के बारे में जानते हैं, लेकिन इस मैपिंग अभ्यास के जरिए हम प्रतीकात्मक स्थानों की पहचान करेंगे, जिसने ऐतिहासिक रूप से उनके समुदाय के विश्वास में मूल भूमिकाएं निभाई हैं। इसलिए उनके साथ विशेष बर्ताव किया जाएगा।”

महासचिव अंटानियो गुटेरेस ने गुरुवार को धार्मिक स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र की कार्य योजना शुरू की थी। इसकी अगुवाई मोराटिनोस करेंगे।

गुटेरेस ने इस वर्ष मार्च में न्यूजीलैंड में दो मस्जिदों पर आतंकी हमले के बाद मोराटिनोस को योजना विकसित करने के लिए कहा था।

— आईएएनएस

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