सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने से संबंधित विभिन्न याचिकाओं को एक संविधान पीठ के पास भेज दी और इन याचिकाओं पर केंद्र सरकार तथा जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे और न्यायमूर्ति एस.ए. नज़ीर की पीठ ने मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी को जम्मू एवं कश्मीर जाने तथा उन्हें पार्टी के उनके साथी मोहम्मद यूसुफ़ तारिमागी से मुलाकात करने की अनुमति दे दी। शीर्ष अदालत ने हालांकि येचुरी को अन्य स्थानों पर न जाने या किसी अन्य गतिविधि में संलिप्त न होने के लिए कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस केंद्र की आपत्ति के बावजूद उसे जारी किया। केंद्र ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 का अंतर्राष्ट्रीय और सीमापार असर है।

पीठ ने कहा, “हमें पता है कि हमें क्या करना है। हमने आदेश पारित कर दिया है और हम इसमें बदलाव नहीं करने जा रहे।”

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केंद्र की तरफ़ से अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है और देश में इस पर जो कुछ भी हुआ है, उसे संयुक्त राष्ट्र में बताया गया है। कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से पूछा कि तो क्या इसका मतलब सुप्रीम कोर्ट अपनी ड्यूटी नहीं करेगा।

पीठ ने कहा कि उसे अपनी ड्यूटी पता है और उसने जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली और क्षेत्र में सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध और उसके परिणामों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करने को मंजूरी दे दी है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिकाओं पर पांच न्यायाधीशों वाली एक संविधान पीठ अक्टूबर के पहले सप्ताह से सुनवाई करेगी।

अदालत नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता मोहम्मद अकबर लोन, नौकरशाह से नेता बने शाह फैज़ल, कश्मीरी कलाकार इंदर सलीम या इंदरजी टीकू और छह सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और नौकरशाहों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने अनुच्छेद 370 को हटाने का विरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने येचुरी को भी जम्मू एवं कश्मीर जाने और पार्टी के उनके साथी तारिगामी से मिलने की अनुमति दे दी।

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केंद्र की तरफ़ से सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि राज्य में येचुरी के दौरे का राजनीतिक उपयोग किया जा सकता है।

हालांकि येचुरी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने कहा कि माकपा नेता यह लिखकर देने के लिए तैयार हैं कि वह सिर्फ़ अपने साथी से मिलने जा रहे हैं।

कोर्ट ने येचुरी को उनके दौरे का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं करने का निर्देश दिया और मेहता से कहा कि येचुरी अगर कोर्ट के आदेश के खिलाफ़ कुछ करते हैं तो सरकार उन्हें रोकने और वापस भेजने के लिए स्वतंत्र है।

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “अगर कोई नागरिक देश के किसी भाग में जाना चाहता है तो उसे ज़रूर भेजना चाहिए।”

कोर्ट ने दौरे पर येचुरी को सुरक्षा देने के मेहता के प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा, “सुरक्षा प्रदान करने की कोई ज़रूरत नहीं है।”

कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को याचिकाकर्ता को यात्रा करने तथा तरिगामी तक पहुंचाने में सहायता करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने येचुरी को दिल्ली लौटने पर कोर्ट में सूचना देने का भी निर्देश दिया।

येचुरी इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा के साथ नौ अगस्त को भी कश्मीर जाने की कोशिश कर चुके हैं। लेकिन दोनों नेताओं को श्रीनगर हवाईअड्डे पर हिरासत में लेकर वापस भेज दिया गया था।

इसके बाद 24 अगस्त को भी पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ विपक्ष के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ कश्मीर जाने का प्रयास कर चुके हैं। लेकिन पूरे समूह को हिरासत में ले लिया गया था और हवाईअड्डे से बाहर जाने से रोक दिया गया था।

विधि स्नातक मोहम्मद अलीम सईद द्वारा दायर एक अन्य बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत शीर्ष अदालत ने सईद को अनंतनाग जाने और अपने परिजनों से मुलाकात करने की अनुमति प्रदान की थी। सईद ने अपने परिजनों का पता लगाने के लिए याचिका दायर की थी।

–आईएएनएस

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