भारत का पहला मून लैंडर विक्रम अंतरिक्ष यान चंद्रयान-2 से सोमवार को अपराह्न 1.15 बजे सफ़लतापूर्वक अलग हो गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह जानकारी दी।

 

चंद्रयान-2 में तीन सेगमेंट -द ऑर्बिटर (2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड्स), द लैंडर विक्रम (1,471 किलोग्राम, चार पेलोड्स) और रोवर प्रज्ञान (27 किलोग्राम दो पेलोड्स) हैं।

विक्रम के साथ भी प्रज्ञान है।

ऑर्बिटर और लैंडर की निगरानी बेंगलुरू में इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) के मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स) द्वारा बेंगलुरू के निकट बीलेलु स्थित इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) की सहायता से की जा रही है।

चंद्रयान-2 ऑर्बिटर और लैंडर सामान्य तरह से काम कर रहे हैं।

विक्रम के अलग होने के बाद नासा ने कहा कि अब दो डी-ऑर्बिटल ऑपरेशंस होंगे, जहां पहला मंगलवार सुबह 8.45 बजे से 9.45 बजे के बीच होगा। वहीं दूसरा बुधवार तड़के तीन बजे से चार बजे के बीच होगा।

विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर सात सितंबर को तड़के 1.30 बजे से 2.30 बजे के बीच उतरेगा।

विक्रम के चांद पर उतरते ही रोवर प्रज्ञान उसमें से निकल आएगा और अनुसंधान शुरू कर देगा, जिसके लिए उसे बनाया गया है।

विक्रम के अलग होने के बावजूद ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ़ चक्कर लगाता रहेगा।

भारत द्वारा कुल 978 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था।

–आईएएनएस

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