अंतरिक्ष उत्साहियों के लिए चंद्रमा पर मानव मिशन भेजना हमेशा एक बड़ा सपना रहा है, और इस क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों स्पेस एक्स के सीईओ रलोन मस्क, ब्लू ऑरिजिन के सीईओ जेफ़ बेजोस और वर्जिन गैलेक्टिस के संस्थापक सर रिचर्ड ब्रानसन के साथ ही नासा का लक्ष्य मनुष्य को गहरे अंतरिक्ष में भेजना है, जिसके लिए चंद्रमा आनेवाले सालों में एक पड़ाव का काम करेगा। भारत ने पांच साल पहले एक इतिहास रचा था, जब किसी देश ने पहले ही प्रयास में चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में कामयाबी हासिल की। अब साल 2022 तक चंद्रमा पर एक मानव मिशन भेजने की तैयारी की जा रही है।

देश के महत्वाकांक्षी ‘गगनयान’ कार्यक्रम के तहत दो अनमैन्ड और एक मैन्ड (मानवयुक्त) फ़्लाइट अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।

देश का मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन प्रधानमंत्री की प्रिय परियोजनाओं में से एक है। इसकी लागत क़रीब 10,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है। भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) के ह्यूमन स्पेस फ़्लाइट सेंटर (एचएसएफ़सी) का लक्ष्य 2022 तक अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजना है।

इसरो ने ‘गगनयान’ परियोजना में मदद के लिए रूस की लांच सेवा प्रदाता ग्लावकोसमोस से समझौता किया है।

ह्यूमन स्पेस फ़्लाइट सेंटर में मानव स्पेश मिशन्स के लिए जरूरी प्रौद्योगिकीयों को विकसित किया जा रहा है।

इस फ़ैकल्टी के निदेशक एस. उन्नीकृष्णन नायर हैं। वहीं, पोलर सैटेलाइट लांच वेहिकल (पीएसएलवी) के निदेशक आर. हट्टन गगनयान परियोजना की अगुवाई कर रहे हैं।

भारत के 2022 में अंतरिक्ष में जाने की योजना बनाने के छह दशक पहले ही रूस अपने अंतरिक्ष यात्री यूरी गगारिन को अंतरिक्ष भेज चुका है। वे अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मानव थे, जो धरती की कक्षा में बाहरी अंतरिक्ष में 1961 में गए थे।

अमेरिका, रूस और चीन केवल ये तीन देश ही मानव स्पेस परियोजना चला चुके हैं।

–आईएएनएस

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